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Thursday, 25 September 2014

मैने इस्लाम क्यूँ कुबूल किया?



आमिना थॉमस (भूतपूर्व ‘अन्नम्मा थॉमस’)
ईसाई पादरी की बेटी
केरल, भारत

"मैं दक्षिणी भारत के एक प्रोटेस्टेंट ईसाई घराने में पैदा हुई और पली-बढ़ी। लेकिन अब मैं बहुत ख़ुश हूं कि मैं एक मुस्लिम औरत हूं। केवल संयोगवश मुसलमान नहीं बनी, बल्कि ख़ूब सोच-समझकर मैंने इस्लाम का चयन किया है। संसार के पालनहार, जिसने सही रास्ते अर्थात् इस्लाम की ओर मेरा मार्गदर्शन किया, उसका मैं जितना भी शुक्र अदा करूं, कम है। मेरा इस्लाम क़बूल करना विभिन्न धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन का परिणाम है। तुलनात्मक अध्ययन ने मेरे मन-मस्तिष्क को क़ायल किया कि इस्लाम ही एक सच्चा धर्म है और अल्लाह का अन्तिम धर्म है। इस्लाम के संबंध में मेरा अध्ययन जारी था कि बेहतर भविष्य के लिए मैं सऊदी अरब गई। यहां मैंने मुसलमानों और उनकी जीवनशैली का बहुत क़रीब से निरीक्षण किया।
सऊदी अरब में मुझे धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन का सुनहरा मौक़ा मिला। लिट्रेचर, ऑडियो, वीडियो कैसिटों के अलावा चलते-फिरते ज़िन्दा प्रमाणों ने मेरी बड़ी सहायता की। ये जीवंत प्रमाण वे मनुष्य थे, जिन्होंने सच्चाई और सत्य धर्म का रास्ता पाने के लिए बड़ी खोज और मेहनत की थी। जब उन्हें सीधी राह मिल गई तो उन्होंने ईसाइयत को अलविदा कहकर इस्लाम क़बूल कर लिया। उन लोगों की खोज और अनुभव मेरे लिए बड़े लाभदायक और मार्गदीप सिद्ध हुए।
अमेरिकी नवमुस्लिम श्रीमती ख़दीजा वॉटसन के साथ, जो किसी अमेरिकी यूनीवर्सिटी में धर्मशास्त्र (Theology) की प्रोफ़ेसर रह चुकी हैं, साक्षात् वार्तालाप आध्यात्मिक शान्ति की तलाश में मेरे लिए बड़ी लाभप्रद रही। इसी बीच मैंने उच्च शिक्षा प्राप्त नवमुस्लिमों की जीवनियों का अध्ययन किया। इनमें प्रोफ़ेसर अब्दुल अहद दाऊद (पूर्व नाम रेवरेंड डेविड बेंजमीन कलदानी), एक बिशप और रोमन कैथोलिक पादरी, ‘मुहम्मद इन दी बाइबल’ का लेखक क़िसीस (पादरी) चार्ल्स विलियम पिकथॉल के बेटे ‘मुहम्मद मारमाड्युक पिकथॉल की कथाएं’ बड़ी महत्वपूर्ण थीं।
मैं यह तो समझ गई थी कि एक ही ख़ुदा हर चीज़ का रचयिता है, लेकिन मुझे यह यक़ीन नहीं था कि सच्चा एक ख़ुदा ईसाइयत में है या इस्लाम में। यह हक़ीक़त है कि दोनों धर्म एक-दूसरे के बहुत क़रीब हैं, मगर इबादत का ढंग बिल्कुल अलग है। अब फिर मैं क्या करूं? यह सवाल मुझे लगातार परेशान कर रहा था। मैंने अपनी यह परेशानी अल्लाह के सामने पेश करने का फै़सला किया। ऐ मेरे अल्लाह! सही धर्म को चुनने में मेरा मार्गदर्शन कर। मैं केवल सच्चाई की तलाश में हूं, इसलिए मुझे गुमराह होने से बचा ले। अगर ईसाई धर्म सच्चा है तो फिर मुझे इस पर जमा दे और इसके बारे में मेरे मन में जो शंकाएं और भ्रम हैं, उन्हें दूर कर दे। अगर इस्लाम सच्चा है तो फिर इसकी सच्चाई की पुष्टि कर और मेरे दिल में इसको जमा दे। मेरी मदद कर और मेरे अन्दर इतनी हिम्मत पैदा कर दे कि मैं अपने भावी धर्म के रूप में उसको कष्बूल कर लूं।’’
क़ुरआन और बाइबल के तुलनात्मक अध्ययन और सच्चे दिल से अल्लाह के सामने दुआ ने इस्लाम की ओर झुके हुए मेरे दिल को ताक़त दी और मैं अन्दर ही अन्दर मुसलमान हो गई। मैंने मुसलमानों की तरह नमाज़ पढ़नी शुरू कर दी। पूरी नमाज़ के दौरान में मैंने महसूस किया कि इस्लाम की सबसे ज़्यादा आकर्षक चीज़ नमाज़ ही है।
"
- आमिना थॉमस
(भूतपूर्व ‘अन्नम्मा थॉमस’)
ईसाई पादरी की बेटी
केरल, भारत