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Saturday, 15 December 2012

इस्लाम की प्रमुख शिक्षाएं


)( ईश्वर एक है, उसका कोई साझी नहीं। वह अकेला है, उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। वह अत्यंत कृपाशील और दयावान् है।
)( ईश्वर अपने बन्दों के प्रति इतना उदार है कि उनकी ग़लतियों और भूलों को क्षमा कर देता है बशर्ते कि वे उसकी ओर रुजू करें। गुनाहगार और पापी भी यदि पश्चाताप प्रकट करके पवित्र जीवन की प्रतिज्ञा करता है तो उस पर भी ईश्वर दया करता है।
)( जिनलोगों ने ईश्वर का भय रखा और परह
ेज़गारी का जीवन बिताया उनके लिए स्वर्ग है। और जिन्होंने ईश्वर का इन्कार किया औन सरकशी का जीवन बिताया उनका ठिकाना निश्चित रूप से नरक है।
)( जो व्यक्ति झूठ न बोले, वादा करके न तोड़े, अमानत में ख़यानत न करे, आंखें नीची रखे, गुप्त अंगों की रक्षा करे और अपने हाथ को दूसरें को दुख और कष्ट पहुंचाने से रोके, वह जन्नत में जाएगा।
)( घमंड से बचो। घमंड ही वह पाप है जिसने सबसे पहले शैतान को तबाह किया।
)( आपस में छल-कपट और बैर न रखो। डाह और ईष्र्या न करो, पीठ पीछे किसी की बुराई न करो। तुम सब भाई भाई हो।
)( शराब कभी न पियो।
)( जीव-जन्तुओं को अकारण मत मारो।
)( माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो। मां-बाप की ख़ुशी में ईश्वर की ख़ुशी है।
)( बाल-बच्चों की अच्छी देख भाल करो और उनको अच्छी शिक्षा दो।
)( किसी इन्सान को किसी पर कोई श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है। हां, वह इन्सान सर्वश्रेष्ठ है जिसके कर्म अच्छे हैं। चाहे उसका सम्बन्ध किसी भी देश अथवा सम्प्रदाय से हो।
)( ब्याज खाना और ब्याज का कारोबार हराम (अवैध) है।
)( नाप-तौल में कमी न करो।
)( सबके साथ न्याय करो, चाहे तुम्हारे रिश्तेदार हो या दुश्मन।
)( अगर कोई किसी इंसान को नाहक़ क़त्ल करता है तो मानो उसने सारे इंसानों की हत्या कर दी। और अगर कोई किसी इंसान की जान बचाता है तो मानो उसने सारे इंसानों को ज़िन्दगी बख्शी।
)( सफ़ाई सुथराई आधा ईमान है।
)( वह आदमी मुसलमान नहीं जो ख़ुद तो पेट भर खाए और उसका पड़ोसी भूखा रहे।
)( सारे इंसानों को मरने के बाद ख़ुदा के सामने हाजि़र होना है और अपने कर्मों का हिसाब देना है। यह दुनिया तो इम्तिहान की जगह है।
)( ख़ुदा इंसानों के मार्गदर्शन के लिए अपने पैग़म्बर भेजता रहा है और अन्त में हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) को अपना आख़िरी पैग़म्बर बनाकर भेजा है। रहती दुनिया तक सारे इंसानों के लिए ज़रूरी है कि हज़रत मुअम्मद (सल्ल.) का अनुसरण करें।
)( क़ुरआन अल्लाह की भेजी हुई किताब है जो हज़रत मुअम्मद (सल्ल.) के ज़रिये समस्त इंसानों की रहनुमाई के लिए भेजी गयी। इसमें पूरी ज़िन्दगी के लिए हिदायतें दी गई हैं।
)( जाति, रंग, भाषा, क्षेत्र, राष्ट्र, राष्ट्रीयता के आधर पर हिकसी के साथ ऊँच-नीच, छूतछात, भेदभाव और पक्षपात का व्यवहार न करो।
)( ग़लत तरीके से दूसरें का माल न खाओ। हलाल (वैध) कमाई करो।